skip to main
|
skip to sidebar
Dohavali
Friday, March 26, 2010
रचनाकार: बिहारी
खेलत फाग दुहूँ तिय कौ मन राखिबै कौ कियौ दाँव नवीनौ
प्यार जनाय घरैंनु सौं लै, भरि मूँठि गुलाल दुहूँ दृग दीनौ
लोचन मीडै उतै उत बेसु, इतै मैं मनोरथ पूरन कीनौ
नागर नैंक नवोढ़ त्रिया, उर लाय चटाक दै चूँबन लीनौ।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Followers
Blog Archive
▼
2010
(13)
►
April
(8)
▼
March
(5)
छत्तीसगढ़ी :रचनाकार: अज्ञात
रचनाकार: तुलसीदास
रचनाकार: अकबर इलाहाबादी
रचनाकार: बिहारी
रचनाकार: कबीर
No comments:
Post a Comment