अंखियां तो छाई परीपंथ निहारि निहारिजीहड़ियां छाला परयानाम पुकारि पुकारिबिरह कमन्डल कर लियेबैरागी दो नैनमांगे दरस मधुकरीछकै रहै दिन रैनसब रंग तांति रबाब तनबिरह बजावै नितऔर न कोइ सुनि सकैकै सांई के चित
....... रचनाकार: कबीर
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